Saturday, 13 September 2025

नए तरह की राजनीती

        राजेश और अजय बड़े अच्छे दोस्त थे| राजेश सॉफ्टवेयर इंजीनियर था| वह एक कम्पनी में काम करता था| अजय एक समाजसेवी था| वह समाज सेवा के कार्यों में लगा रहता था| एक दिन राजेश की मुलाकात बाजार में अजय से हुई | अजय बोला भाई कहा हो बहुत दिनों से दिखाई नहीं दिए, राजेश बोला यार क्या बताऊ में कम्पनी के काम से शहर से बहार गया था | आज ही आया हूँ , तू अपनी बता समाज सेवा कैसी चल रही है , अजय बोला ठीक चल रही है| चल में तुझे चाय पिलाता हूँ, यह कह कर वह दोनों चाय की दुकान की ओर चल दिए चाय की दुकान पर पहुच कर अजय ने चाय बोली, वे दोनों बैठ कर इधर- उधर की बात करने लगे| तभी चाय वाला चाय ले आया दोनों चाय पीने लगे, चाय दूकान पर कुछ लोग राजनीती पर चर्चा करने लगे, चर्चा किसको टिकिट मिलेगा इस विषय पर हो रही थी| वह दोनों भी चर्चा को बड़े ध्यान से सुन रहे|कुछ समय बाद बिधानसभा चुनाव थे| कुछ देर बाद अजय बोला यार इस बार तो हम किसी निर्दलीय को ही वोट देगे,ये राजनैतिक दल के उमीदवार तो जीतने के बाद ठीक ढंग से बात ही नही करते है| राजेश बोला वो तो ठीक है निर्दलीय भी तो जीतने के बाद इन्ही दलों से मिल कर सरकार बना लेते है |ओर जनता की कोई नहीं सुनता| अजय बोला नहीं यार अगर निर्दलीय चाहे तो सरकार को घुटने टेकने पर मजबूर कर सकता है| जरूवत है सिर्फ जनता को जागरूक करने की,इसलिए आपना वोट तो निर्दलीय को इस बार और में तो इस बार निर्दलीय उम्मीदवार को वोट दिलवाने के लिए जनता को भी जागरूक करूगा|

           दोनों मे बहस काफी बढ़ गयी, राजेश बोला अजय तू क्यों नहीं खड़ा हो जाता है इस बार , अजय बोला  क्यों मजाक करता है| तू तो जनता है,चुनाव लडने के लिए एक बड़ी टीम वह पैसों की जरूवत होती है| राजेश उसकी चिंता मत कर उसका इंतजाम में कर लुगा और चुनाव भी जीता दुगा में उसके बाद देखुगा तो जनता के सपने कैसे पुरे करता है| अजय बोला वो कैसे, राजेश वो में तुझे अभी नहीं बता सकता तू शाम को मेरे घर आ जा वही बात करेगे यह कह कर राजेश उठा और चाय वाले को पैसे दिए और घर की और चल दिया | यहाँ अजय बैठा हुआ यह सोच रहा था, कि राजेश के पास ऐसा क्या जो वह ऐसी बात कर रहा है| फिर वह भी उठा और अपने घर की ओर चल दिया| रास्ते में भी वह यह सोच रहा|कि  शाम को राजेश उसको क्या बताएगा ये तो वही जा कर पता चलेगा | शाम को वह राजेश मिलने उसके घर गया| राजेश घर पर ही था उसी ने दरवाजा खोला, अजय ने पूछा भाभी कहा है| राजेश ने उसे बताया वह शहर से बाहर गयी है |राजेश उसे आपने ड्राइंग-रूम में ले गया|और ठन्डे की दो बोतल निकाल ली एक अजय को पकड़ा कर दूसरी बोतल अपने मुह से लगा कर वह ठंडा पीने लगा| लेकिन अजय राजेश की और टकटकी लगाकर देखते हुए बोला तू चाय की दूकान पर क्या बोल रहा था| राजेश बोला अरे यार तू ठंडा तो पी में तुझे सब बताता हूँ, तू ई. वी .एम. मशीन के बारे में तो जानता ही होगा? अजय बोला हा भाई क्यों नहीं उसी से तो वोटिंग होगी|राजेश बोला तू ध्यान से सुन में उसको हैक कर सकता हूँ, अजय बोला क्या बात कर रहा है, में नहीं मानता, राजेश ने उसे अपने लैपटॉप पर एक सॉफ्टवेयर खोल कर दिखाया कि वह किस तरह ई. वी. एम. मशीन को हैक कर सकता है| अजय बोला क्या यह सही है | राजेश बोला बिलकुल सही है भाई लेकिन यह गैर क़ानूनी है| इसलिए किसी को पता नहीं चलना चाहिए | और में भी इसका उपयोग सिर्फ तेरे लिए ही करूगा वह भी एक बार उसके बाद तुझे जनता के सपनो को पूरा कर के अपने ऊपर जनता का बिश्वास पैदा करना होगा ताकि वह तुझे आगली बार वोट दे, और में भी देखना चाहता हूँ तू किस तरह जनता का बिश्वास जीतता है | अजय बोला ठीक है अब क्या –क्या करना होगा इसकी हम एक लिस्ट बना लेते है| राजेश बोला ठीक है मैंने सब सोच के रखा है| तेरा नामांकन करवाना है और कुछ जगह पर तेर कटआउट लगवाने है | और थोडा बहुत चुनाव प्रचार करना है | बाकी तो में सब कर लुगा| राजेश और अजय ने यही सब किया| लोगों ने उनका मजाक उडाया बड़े –बड़े दलों के सामने अजय की क्या हैसियत , आखिर वह दिन आ गया जब वोटिंग हुई, और चुनाव का रिजल्ट भी आ गया ,जिसमे अजय भारी बहुमत से जीत गया था |लोगों को विश्वास नहीं कि अजय चुनाव जीत गया है अब अजय के आस पास उन लोगों की भीड़ लगने लगी जो कभी अजय का चुनाव में खड़े होने पर मजाक उड़ाते थे | सरकार बनाने के लिए अजय का समर्थन हासिल करने के लिए पाटी के नेताओं ने अजय से बात करने के लिए बुलाया और अजय को उन्होंने पद देने का लालच दिया | अजय ने उनके सामने अपने क्षेत्र सभी समस्याओ का निराकरण करने की मांग की, पाटी के नेताओं द्वारा उसे आश्वासन भी दिया कि उसकी सभी मांगो पर विचार किया जायेगा | अजय के द्वारा आश्वासन नहीं लिखित में मांग पूरी करने की गारंटी मांगी गयी, जिससे पाटी के नेता अजय से चिढ गए, उन्होंने अजय को बात में बात करते है करते है यह कह कर कन्नी काट ली,अजय भी यह बात समझ गया था| राजेश को जब यह बात पता चली तो वह अजय से बोला भाई अब में देखता हूँ तू क्षेत्र की समस्याओं के लिए क्या करता है |अजय बोला देखते जा अब एक संगठन बनाता हूँ जो क्षेत्र की सभी समस्याओं के निराकरण के लिए काम करेगा ,राजेश बोला में समझा नहीं ,तू समझना छोड़ तू मेरे सगठन का नाम सोच और में जो तुझे बताता हूँ वह कर राजेश बोला यार निराकरण ही रख ले सगठन का नाम अजय बोला हां यार तू सही कह राहा है |में अपने संगठन का नाम निराकरण ही रखता हूँ, अब मुझे एक टीम की आवश्यकता है | जो सस्याओ के निराकरण के कार्य मे मुझे सहयोग करेगी | इसके बाद अजय ने राजेश के सहयोग से बेरोजगार युवकों की एक टीम बनाई जो इमानदारी से उसके साथ कार्य करने लगी, अजय उनके साथ गाव –गाव घुमकर सभी लोगों से मिलकर उनकी सभी समस्याओं को एक रजिस्टर में लिखने लगा, इस तरह उससे अपने क्षेत्र की सभी समस्याओं की जानकारी हो गयी | इसके बाद उसने राजेश के साथ मिल कर उन समस्याओ को दूर करने के लिए प्रयास करने शुरू कर दिए| जिसमे से कुछ समस्याएं दूर हो गई| कुछ समस्याओ को दूर करने का अजय वह राजेश ने काफी प्रयास किया मगर कुछ हो न पाया | अजय ने मंत्री वह मुख मंत्री से मिलकर समस्याओं का जिक्र किया मगर वहा से आश्वासन के सिवा कुछ न हुआ| अजय काफी परेशान हो गया| एक दिन वह जब इन समस्याओं के बारे में सोच रहा था| अचानक उसे सूचना के अधिकार वह मुख्यमत्री द्वारा शिकायत दर्ज करने के पोटल की याद आयी , उसने सभी समस्याओं को सूचना के अधिकार वह मुख्यमत्री पोटल के द्वारा शिकायत करने की योजना बनाई, उसने जनता की ओर से शिकायत करके शिकायतों का ढेर लगा दिया | शिकायतों की सख्या से घबराकर सम्बन्धित विभाग द्वारा सभी शिकायतों का निराकरण कर दिया गया | अजय ने अपनी टीम से साथ गाव- गाव घूमकर सभी सूचना के अधिकार वह मुख्य मंत्री पोटल में शिकायत कैसे की जाती है, यह सिखाया जिसका परिणाम यह हुआ लोगों  ने  अब अपनी शिकायतों के लिए अफसरों के चक्कर लगाना छोड़ कर अफसरों को चक्कर लगाने के लिए मजबूर कर दिया| जिसका परिणाम यह हुआ कि क्षेत्र की सभी समस्याओं से छुटकारा मिल गया | और अजय काफी लोकप्रिय हो गया| क्षेत्र  की जनता अजय से बहुत खुश थी| यह देखकर राजेश बोला मान गया भाई, अगर इंसान चाहे तो कुछ भी कर सकता है | अजय की लोकप्रियता देख कर बड़े – बड़े राजनैतिक अजय से जलने लगे, उन्हें अपना वोट बैंक खिसकता हुआ दिखाई देने लगा | अब तो उन्हें अपनी कुर्सी पर भी खतरा नजर आने लगा था| क्युकी पहली बार कोई नेता सिर्फ जनता के लिए पूरी ईमानदारी से  काम कर रहा था| उन्होंने अजय को बदनाम करने के लिए पत्रकारों को काम पर लगाया, पत्रकारों ने अजय के खिलाफ पेपर में अनाप-सनाप   छापना शुरू कर दिया | और अजय के खिलाप जाँच की मांग करने लगे सरकार से, और सरकार तो इसी इन्तजार में बैठी थी |कि मौका मिले अजय को बदनाम कर जनता की नजरों मे गिरा दिया जाए|

नेताओं और पत्रकारों की इस चाल को अजय और जनता भली- भाति समझ रही थी | जनता ने अपना विरोध करना शुरू कर दिया | उन्होंने अजय के नेतत्व में उस अखबार का विरोध करने का फैसला किया उन्होंने उस अखबार को खरीदना बंद कर दिया, और अपने रिश्तेदारों को भी उस अखबार को खरीदने से मना कर दिया| धीरे-धीरे इस आन्दोलन से पहले क्षेत्र फिर पुरे राज्य   में उस अखबार का विरोध होने लगा| लोगों ने उस अखबार में प्रकाशित होने विज्ञापनों के सामान का भी विरोध करना शुरू कर जिससे उन सामानों की बिक्री काफी गिर गयी| और कम्पनियों को भारी नुकशान होने लगा| उन कम्पनियों ने उस अखबार को अपने विज्ञापन देने बंद कर दिए | अखबार विक्री न होने के कारण पहले ही नुकशान पर था, कम्पनियों के इस कदम से अखबार की कमर ही टूट गयी| घबराकर अखबार मालिक ने न्यायालय की शरण ली और अजय के खिलाफ केस दर्ज कर दिया| अखबार मालिक के वकील ने अजय पर लोकतंत्र के तीसरे सतम्भ पर हमला करने का आरोप लगाया | और न्यालय से अजय के खिलाफ सक्त से सक्त कार्यवाही करने की मांग की , न्यायाधीश ने अजय को अपने सामने पेश होने को काहा अजय अपनी टीम वह राजेश और जनता से कुछ लोगों के साथ न्यालय में न्यायाधीश के सामने अपने वकील के साथ आया | अखबार मालिक के वकील ने अजय पर अखबार के खिलाफ साजिस करने व पत्रकारिता पर हमले का आरोप जिसका जबाब अजय के वकील ने दिया उसने कहा महोदय अखबार ने अजय के खिलाप अनाप – सनाप लिख कर अजय व क्षेत्र की जनता को बदनाम करने की साजिश की है| जिसके सभी – सबूत में आपकी टेबल पर रख रहा हूँ | सारे सबूत देखने के पश्चात न्यायाधीश ने अखबार मालिक के वकील को अपने सबूत पेश करने को कहा वह कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाया|  न्यायाधीश से सबूत पेश करने के लिए और समय की मांग की, जिसका अजय के वकील विरोध किया ,वकील ने काहा महोदय अखबार ने बिना सबूत के अजय खिलाफ अखबार में अनाप- सनाप कैसे लिख दिया | अखबार ने एक साजिस के तहत यह सब किया इसमें कुछ नेताओं का भी हाथ है | न्यायाधीश ने दोनों वकीलों के बात को सुनने के बाद ये फैसला दिया| कि अखबार द्वारा लगाए गए सभी आरोप गलत है |इसलिए अखबार पथम पेज पर अपना माफ़ी नामा एक महीने तक प्रकाशित करेगा| और अजय अपने साथियों से अखबार का विरोध न करने का अनुरोध करेगा| यह सुनते क्षेत्र की जनता ने अजय को कधे में उठा खुशी का इजहार किया | अजय ने काहा यह जनता की जीत है |और यह एक नयी और सच्ची  राजनीती है | जिसमें जनता का बहुत बड़ा योगदान है |आज हमारे देश एसी ही राजनीती की आवश्यकता है|